दोस्तों दिहाड़ी मजदुर श्याम की शादी रूपा से दो साल पहले ही हुई थी. श्याम
कन्स्ट्रक्शन लाइन में सीमेंट कोंक्रिट बनाने से ले के घर को बनाने के हर काम में
अनुभवी था. सुबह उठ के वो बस स्टॉप पर चला जाता जहाँ से ठेकेदार बाबु उन लोगों को
काम के लिए अलग अलग जगह अपनी जरूरत के मुताबिक़ ले के जाते थे.
रूपा भी पति को हाथ बटाने के लिए मजदूरी करती थी. लेकिन जब श्याम को पता चला
की रूपा पेट से हैं तो उसने उसे काम के लिए मना कर दिया. रूपा ने बहुत कहा की अभी
वो काम कर सकती हैं लेकिन श्याम ने कहा, हम दुगुना बोज उठा लेंगे लेकिन तुमको तनिक भी काम
नहीं करने देंगे यह समझ लो.
पति का प्यार देख के रूपा की आँखे छलक आई.
उस दिन से रूपा घर अपनी झोंपड़ी में ही रहती थी और अपने बूढ़े सास ससुर की
देखभाल करती थी. रूपा के ससुर का नाम उत्तमदास था और सास चमेलीदेवी. उत्तमदास सुबह
सुबह ही देसी दारु लगा के अपनी चारपाई पर बैठा हुआ था. चमेलीदेवी पड़ोस के घर में
झोपड़ेवाली उमा के साथ घेहूँ साफ़ कर रही थी. उत्तमदास ने बीडी सुलगाई और वो धुआ
फेंकने लगा अपने मुहं से.
तभी रूपा अपने हाथ में पेटीकोट और ब्रा लिए नहाने के लिए घुसी. झोपड़े में
बाथरूम तो कहा से होना था. चारोतरफ टाट बाँध के एरिया कोरडन किया हुआ था. ऊपर खुला
हुआ था जहाँ से झोपड़े की छत दिख रही थी. पानी के बहाव के लिए एक निक बनी हुई थी.
अंदर बाल्दी और लोटा था.
रूपा ने कपडे टाट पर टाँगे और वो लकड़ी की पट्टियों के सहारे बने हुए दरवाजे से
आड़ करने लगी. उत्तमदास का मुन्ना मतलब उनका लौड़ा कुलबुल करने लगा था पेंट में.
चमेलीदेवी ने फुदी मरवाए अब तो एक दशक हो गया था. जब दस साल पहले चमेली देवी का
मासिक बंध हुआ तो उसे सेक्स से रूचि भी उड़ सी गई.
दस साल से उत्तमदास अपने हाथ से हिला हिला के काम चला रहा था. कभी कबार बस
स्टेंड के पास वो रंडियां देखने भी जाता था. जी हाँ देखने, चोदने नहीं. भला गरीब आदमी रंडी
की चुदाई के paise भी कहाँ से ले के आएगा. जब से रूपा घर में आई हैं उत्तमदास ने बस स्टॉप जाना
बंध किया हैं. अब वो घर में ही चूत के दर्शन कर लेता हैं, और आज भी मौका ऐसा ही था.
रूपा अनजान बन के अपने कपडे खोल रही थी. ब्लाउज खोल के उसने अपने चुन्चो की और
देखा, प्रेग्नन्सी
की वजह से उसके निपल्स टाईट हुए थे जिसे देख के वो मन ही मन में खुश हो रही थी.
उसे क्या पता के टाट के एक छेद से उसके ससुर की आँख उसे देख रही थी. रूपा ने
अब पेटीकोट खोला, चूत के ऊपर लिक्विड निकल के जमा हुआ था. दरअसल चूत से निकले प्रवाही की वजह से
ही रूपा नहाने के लिए आई थी.
उत्तमदास ने अपनी नजरें अंदर लगाईं थी और वो अपनी बहु की चूत देख के अपने लौड़े
को मजे दे रहा था. बिच बिच में वो बहार भी नजर कर लेता था ताकि कोई आये तो वो धर
ना लिया जाए.
रूपा ने अब साबुन से अपनी चूत को साफ़ करना चालू किया. चूत के बाल और ऊपर सफ़ेद
झाग, उत्तमदास
तो जैसे फ्री में पोर्न मूवी देख रहा था. रूपा ने चूत को धोने के बाद अपनी
चुन्चियों पर साबुन लगाया. चुंचे साबुन से मलने के बाद उसने अपने सारे बदन के ऊपर
पानी डाला. ठन्डे पानी की वजह से उसके मुह से उह उह भी निकल गया. उत्तमदास बहु की
चूत देख के लौड़े को थपथपा रहे थे.
उनका बुढऊ लंड लपकार लेने लगा था और वो मदहोश हो रहे थे. उनका बस चलता तो वो
अंदर घुस के रूपा के बुर में लौड़ा पेल देते लेकिन अभी वो बेटे की कमाई पर पल रहे
थे इसलिए कुछ कर नहीं सकते थे.
रूपा ने अब रुमाल से बदन को पोंछना चालू किया. उत्तमदास चुपचाप से अपनी चारपाई
पर जा बैठा जैसे कुछ हुआ ही नहीं. रूपा ने बहार आके अपने बाल झटके और वो कपडे
सुखाने के लिए बहार निकल गई. उत्तमदास ने अपना खड़ा हुआ लंड धोती के पीछे छिपाया और
फट से वो बाथरूम में घुस गया. मुतने के बहाने वो अंदर गया और अपना लंड निकाल के
हिलाने लगा.
उसके बूढ़े लौड़े के अंदर बड़ी ही जान आ गई थी. वो अपना लौड़ा निकाल के जोर जोर से
हिलाने लगा. उसकी आँखे बंध थी और वो अपनी बहु रूपा के चुंचे, चूत और गांड की कप्लना
कर के लौड़े को जोर जोर से मर्दन करता जा रहा था.
इस बूढ़े के मुहं से आह आह निकल रहा था. काफी दिनों से उसने मुठ भी नहीं मारी
थी और उसकी हवस बढ़ चली थी. वो लंड को जोर जोर से मलने लगा था अब.
तभी उसके लौड़े ने पिचकारी मारी और वीर्य का फव्वारा निकल के निचे फर्श पर जा
गिरा. बूढ़े ने फट से अपने वीर्य को पानी से धो दिया. उत्तमदास खड़ा हुआ और अपनी
धोती सही कर के व बहार आया. बहार रूपा खड़ी अपने बाल सुखा रही थी. एक पल के लिए तो
उत्तमदास को लगा की रूपा ने उसकी आह आह सुन ली थी.
बाबु जी आप दोपहर में चोली की सब्जी खा लेंगे ना, माँ पूछ रही थी?
उत्तमदास ने उखड़ी हुई सांस को काबू ले लेते हुए कहा, हा हा बेटा जो तुम दोनों को ठीक
लगे.
उत्तमदास फिर अपनी चारपाई के ऊपर जा के बैठ गया और बीडी सुलगा के फूंकने लगा.
रूपा घर में काम करती रही और वो उसकी मटकती गांड को देखता रहा….!
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